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श्रवणबेलगोला · श्री लक्ष्मी
दीपावली कार्तिक अमावस्या को मनाया जाने वाला प्रकाश का महापर्व है। इस दिन माँ लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। घर को दीपों से सजाया जाता है। यह पर्व भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या वापसी की खुशी में भी मनाया जाता है।
⏱ समय श्रवणबेलगोला के अनुसार · तिथि व नक्षत्र सम्पूर्ण भारत में समान
धनतेरस पर भगवान धन्वन्तरि और माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन स्वर्ण, चाँदी या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। शाम को दीप जलाकर यमराज के लिए दक्षिण दिशा में रखते हैं।
इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। ब्रह्म मुहूर्त में अभ्यंग स्नान (तेल स्नान) करना अत्यंत शुभ है। सायंकाल दीप जलाकर छोटी दीपावली मनाई जाती है।
दीपावली का मुख्य दिन — अमावस्या की रात्रि को माँ लक्ष्मी और श्री गणेश की विधिवत पूजा की जाती है। पूरा घर दीपों से सजाया जाता है। यह अँधेरे पर प्रकाश की विजय का पर्व है।
भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है। छप्पन भोग (56 व्यंजन) अर्पित किए जाते हैं।
भाई दूज पर बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लम्बी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है। भाई बहन को उपहार देता है। यह भाई-बहन के प्रेम का पावन त्योहार है।