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हिन्दू मंत्र संग्रह — 20 मंत्र
मंत्र (संस्कृत: मन + त्र = मन का रक्षक) एक पवित्र अक्षर, शब्द या वाक्य है जिसकी सही उच्चारण और पुनरावृत्ति मन को शुद्ध कर दिव्य शक्ति का आह्वान करती है। मंत्र मानव इतिहास की प्राचीनतम प्रार्थना-विधि है — ऋग्वेद में 3,500 वर्ष पूर्व रचित।
बीज मंत्र एकाक्षर शक्ति-ध्वनियाँ हैं (OM, ऐं, ह्रीं, क्लीं); गायत्री मंत्र दिव्य प्रज्ञा की याचना करते हैं; नमः मंत्र आराधना के हैं; श्लोक पद्य-प्रार्थनाएँ हैं; स्तोत्र भावमय स्तुतियाँ हैं; मूल मंत्र देवता का प्राथमिक आह्वान है।
जाप अर्थात मंत्र की ध्यानपूर्वक पुनरावृत्ति, जो परम्परागतः १०८ मनकों की माला पर की जाती है। १०८ संख्या पवित्र है — १ (परमसत्ता), ० (शून्य), ८ (अनंत)। एक माला = एक मानसिक चक्र।
नियमित मंत्र-जाप से मन की एकाग्रता बढ़ती है, तनाव कम होता है और आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है। ध्वनि-कंपन (नाद) नाड़ी-तंत्र को सक्रिय करता है और देवता की कृपा का मार्ग खोलता है।