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संपूर्ण आरती संग्रह — 15 आरतियाँ
आरती हिंदू पूजा-पद्धति में प्रज्वलित दीप को देवता के सामने दक्षिणावर्त घुमाने और भक्ति गीत गाने की परम्परा है। "आरती" शब्द संस्कृत के आरात्रिक से बना है — सांध्यकालीन दीप-पूजा। यह मंदिरों में प्रातः, मध्याह्न और सांध्य — तीन समय होती है।
थाली में दीप, अगरबत्ती, शंख और पुष्प सजाए जाते हैं। दीप को देवता के सामने घुमाते हुए आरती का पाठ किया जाता है। भक्त लौ के ऊपर हाथ फेरकर आँखों से लगाते हैं — यह ईश्वर की कृपा-शक्ति ग्रहण करने का प्रतीक है।
शास्त्रों के अनुसार आरती के समय जलता दीप ज्ञान का प्रतीक है जो अज्ञान-अंधकार को नष्ट करता है। आरती-गायन से वातावरण शुद्ध होता है और मन एकाग्र होता है। ध्वनि-कंपन और प्रकाश मिलकर एक विशेष दिव्य ऊर्जा का संचार करते हैं।
ॐ जय जगदीश हरे (सार्वभौम विष्णु आरती), जय गणेश जय गणेश देवा, जय अम्बे गौरी और जय शिव ओंकारा — ये भारत के प्रत्येक हिंदू घर और मंदिर में गाई जाती हैं।