भक्तिमाला ऐप
🔔 रिमाइंडर · 🪔 आरती · 📿 पंचांग
संत कबीर दास — 150 दोहे
संत कबीर दास (१४४०–१५१८) निर्गुण भक्ति के महान कवि थे। इनके दोहे हिन्दू, मुस्लिम और सिख परम्पराओं में समान रूप से पूजित हैं — सरल भाषा में गहन जीवन-सत्य।
कबीर का जन्म वाराणसी के निकट हुआ। वे जुलाहे (बुनकर) परिवार में पले-बढ़े। संत रामानन्द के शिष्य बने और ज्ञान, प्रेम तथा साधना का मार्ग अपनाया। उन्होंने जाति-पाँति, पाखंड और बाहरी धार्मिक आडम्बर का खुलकर विरोध किया।
कबीर की भाषा को "सधुक्कड़ी" या "पंचमेल खिचड़ी" कहा जाता है — हिंदी, अवधी, ब्रजभाषा, राजस्थानी और पंजाबी का मिश्रण। इसी सरल लोकभाषा ने उनके दोहों को आम जनता तक पहुँचाया।
कबीर के दोहे आज भी स्कूली पाठ्यक्रम, शास्त्रीय संगीत और लोकगीतों में जीवित हैं। सिख धर्म के गुरु ग्रंथ साहिब में उनकी रचनाएँ संकलित हैं। कबीर पंथ के लाखों अनुयायी आज भी उनकी शिक्षाओं का पालन करते हैं।