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दुर्गा सप्तशती
दुर्गा सप्तशती
श्रीदुर्गासप्तशती
प्रारंभिक पाठ
सप्तश्लोकी दुर्गा
सात श्लोकों में दुर्गा-स्तुति
श्रीदुर्गाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्
दुर्गाजी के 108 नामों का स्तोत्र
पाठविधिः
सप्तशती-पाठ की विधि
देव्याः कवचम्
पाठ से पहले पढ़ा जाने वाला देवी का रक्षा-कवच
अर्गलास्तोत्रम्
रूपं देहि जयं देहि — पाठ से पहले की स्तुति
कीलकम्
पाठ से पहले पढ़ा जाने वाला कीलक स्तोत्र
वेदोक्तं रात्रिसूक्तम्
ऋग्वेद का रात्रि-सूक्त
तन्त्रोक्तं रात्रिसूक्तम्
ब्रह्माजी द्वारा योगनिद्रा देवी की स्तुति
श्रीदेव्यथर्वशीर्षम्
अथर्ववेदीय देवी-उपनिषद्
नवार्णविधिः
नवार्ण मन्त्र के जप की विधि
सप्तशतीन्यासः
पाठ से पहले किया जाने वाला न्यास
प्रथम चरित्र
अध्याय 1
अध्याय १ — मधुकैटभ-वध
प्रथमोऽध्यायः
104 श्लोक
मध्यम चरित्र
अध्याय 2–4
अध्याय २ — महिषासुर-सैन्य-वध
द्वितीयोऽध्यायः
69 श्लोक
अध्याय ३ — महिषासुर-वध
तृतीयोऽध्यायः
44 श्लोक
अध्याय ४ — शक्रादि-स्तुति
चतुर्थोऽध्यायः
42 श्लोक
उत्तम चरित्र
अध्याय 5–13
अध्याय ५ — देवीदूत-संवाद
पञ्चमोऽध्यायः
129 श्लोक
अध्याय ६ — धूम्रलोचन-वध
षष्ठोऽध्यायः
24 श्लोक
अध्याय ७ — चण्ड-मुण्ड-वध
सप्तमोऽध्यायः
27 श्लोक
अध्याय ८ — रक्तबीज-वध
अष्टमोऽध्यायः
63 श्लोक
अध्याय ९ — निशुम्भ-वध
नवमोऽध्यायः
41 श्लोक
अध्याय १० — शुम्भ-वध
दशमोऽध्यायः
32 श्लोक
अध्याय ११ — देवी-स्तुति
एकादशोऽध्यायः
55 श्लोक
अध्याय १२ — फलस्तुति
द्वादशोऽध्यायः
41 श्लोक
अध्याय १३ — सुरथ-वैश्य-वरप्रदान
त्रयोदशोऽध्यायः
29 श्लोक
पूरक पाठ
उपसंहारः
पाठ के बाद समापन की विधि
ऋग्वेदोक्तं देवीसूक्तम्
ऋग्वेद का देवी-सूक्त — अहं रुद्रेभिः
तन्त्रोक्तं देवीसूक्तम्
नमो देव्यै महादेव्यै — पाठ के बाद की स्तुति
प्राधानिकं रहस्यम्
देवी के मूल स्वरूप का रहस्य
वैकृतिकं रहस्यम्
महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती के पूजन का रहस्य
मूर्तिरहस्यम्
नन्दा, शाकम्भरी, भ्रामरी आदि देवी-मूर्तियों का वर्णन
क्षमा-प्रार्थना
पाठ के अन्त में देवी से क्षमा-याचना
श्रीदुर्गामानस-पूजा
मन से की जाने वाली दुर्गा-पूजा
दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला
दुर्गाजी के बत्तीस नाम
देव्यपराधक्षमापनस्तोत्रम्
न मन्त्रं नो यन्त्रं — अपराधों की क्षमा का स्तोत्र
सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्
जिसके पाठ मात्र से सप्तशती-पाठ का फल मिलता है
सप्तशतीके कुछ सिद्ध सम्पुट-मन्त्र
सप्तशतीसिद्धसम्पुटमन्त्राः
आरती
श्रीदेवीजीकी आरती
जगजननी जय! जय!
श्रीअम्बाजीकी आरती
जय अम्बे गौरी
देवीमयी
तव च का किल न स्तुतिरम्बिके