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लेस्टर · श्री व्यास (गुरु)
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन गुरु की कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है — चाहे वे आध्यात्मिक गुरु हों, शिक्षक हों या माता-पिता। हिंदू, बौद्ध और जैन — तीनों परंपराओं में यह पर्व मनाया जाता है।
इस दिन को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं क्योंकि यह महर्षि वेद व्यास का जन्म-दिवस माना जाता है। व्यासजी ने वेदों का संकलन किया, 18 पुराणों की रचना की, महाभारत लिखा और ब्रह्मसूत्र की रचना की। वे "आदि गुरु" — समस्त ज्ञान के प्रथम गुरु — माने जाते हैं।
बौद्ध धर्म में यह धर्म चक्र प्रवर्तन दिवस है — जिस दिन भगवान बुद्ध ने बोध-प्राप्ति के बाद सारनाथ में अपने पाँच शिष्यों को प्रथम उपदेश दिया और धर्म के चक्र को गति दी।
इस दिन गुरु-पादुका पूजन, गुरु के चरण-स्पर्श, गुरु-दक्षिणा और सत्संग का आयोजन होता है। ध्यान-साधना, प्रवचन और शास्त्र-पाठ विशेष रूप से किए जाते हैं। आश्रमों और योग-केंद्रों में विशेष कार्यक्रम होते हैं।
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। महर्षि वेदव्यास का जन्म इसी दिन हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।
⏱ समय लेस्टर के अनुसार · तिथि व नक्षत्र सम्पूर्ण भारत में समान
⏰ समय लेस्टर के स्थानीय समयानुसार (Europe/London)