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मायापुर · पर्व विवरण
मकर संक्रांति वह दिन है जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश करते हैं — उत्तरायण का आरंभ। यह पर्व प्रतिवर्ष 14-15 जनवरी को पड़ता है और पंचांग के कुछ गिने-चुने पर्वों में से एक है जो सौर कैलेंडर पर आधारित है, चंद्र कैलेंडर पर नहीं।
महाभारत में भीष्म पितामह ने उत्तरायण की प्रतीक्षा में बाणों की शय्या पर प्राण धारण किए — क्योंकि उत्तरायण में देह त्यागने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन तिल-गुड़ का दान और सेवन, गंगा-स्नान और खिचड़ी का भोग विशेष फलदायी माने जाते हैं।
गुजरात में उत्तरायण — आसमान पतंगों से भर जाता है; रात्रि में टेटू (रोशन पतंगें) उड़ाई जाती हैं। तमिलनाडु में पोंगल — चार दिन का फसल उत्सव, नए धान की खिचड़ी पकाई जाती है। पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी (एक दिन पूर्व) — अलाव, भाँगड़ा, रेवड़ी-मूँगफली। असम में भोगाली बिहू — मेजि (अलाव) जलाकर फसल का उत्सव।
तिल-गुड़ के लड्डू और चिक्की — "तिल गुड़ घ्या, गोड गोड बोला" (महाराष्ट्र का प्रसिद्ध अभिवादन: तिल-गुड़ लो, मीठा बोलो)। खिचड़ी (उत्तर प्रदेश/बिहार) — पोंगल (तमिलनाडु) — पाठीसापट (आंध्र प्रदेश)।
मकर संक्रांति पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। यह दिन उत्तरायण का आरंभ माना जाता है। इस दिन तिल-गुड़ के लड्डू और खिचड़ी का विशेष महत्व है। गंगा स्नान और दान का विशेष फल मिलता है।
⏱ समय मायापुर के अनुसार · तिथि व नक्षत्र सम्पूर्ण भारत में समान