हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी।
करो कृपा सदा हे त्रिपुरारी॥
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गंगा जटा में, चंद्र ललाट में।
त्रिनेत्र विशाल, रुद्राक्ष माल में॥
हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी।
करो कृपा सदा हे त्रिपुरारी॥
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नंदी पर बैठे, डमरू बजाते।
भस्म लेपन से, देह सजाते॥
हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी।
करो कृपा सदा हे त्रिपुरारी॥
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भोले कहो शंकर, शंभु महादेव।
काशी के स्वामी, करते अभिषेक॥
हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी।
करो कृपा सदा हे त्रिपुरारी॥
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माँ पार्वती संग, नंदन गणेश हैं।
कार्तिक शक्तिधर, परिवार विशेष हैं॥
हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी।
करो कृपा सदा हे त्रिपुरारी॥
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शिवरात्रि के दिन, व्रत जो करे।
महादेव की कृपा, उन पर सदा बरे॥
हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी।
करो कृपा सदा हे त्रिपुरारी॥
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हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी के बारे में
“हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी” शिव को समर्पित एक लोकप्रिय भजन है। नीचे इसके पूर्ण बोल शुद्ध हिंदी में दिए गए हैं। इसे भजन-कीर्तन, पूजा या नित्य स्मरण में गा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी के बोल कहाँ पढ़ें?
हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और भजन-कीर्तन में गा सकते हैं।
हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान शिव को समर्पित है और उनकी भक्ति व स्तुति में गाया जाता है।
हे शिव शंकर हे भोले भण्डारी कब गाया जाता है?
इसे प्रातः या संध्या पूजा, आरती, भजन-कीर्तन के दौरान अथवा नित्य स्मरण के रूप में किसी भी समय गाया जा सकता है।