लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥
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शंख चक्र गदा पद्म, हाथों में धारे।
पीताम्बर पहने देव, सर्व जग के प्यारे॥
लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥
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क्षीरसागर में शेष पर, लेटे नारायण।
ब्रह्मा नाभि से उत्पन्न, सृष्टि के कारण॥
लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥
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दशावतार धरण किए, जग की रक्षा को।
मत्स्य कूर्म वराह और, नरसिंह वामन को॥
लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥
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राम कृष्ण बुद्ध कल्कि, अवतार आए।
युग युग में भगवान, भक्तों को तराए॥
लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥