लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥
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शंख चक्र गदा पद्म, हाथों में धारे।
पीताम्बर पहने देव, सर्व जग के प्यारे॥
लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥
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क्षीरसागर में शेष पर, लेटे नारायण।
ब्रह्मा नाभि से उत्पन्न, सृष्टि के कारण॥
लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥
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दशावतार धरण किए, जग की रक्षा को।
मत्स्य कूर्म वराह और, नरसिंह वामन को॥
लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥
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राम कृष्ण बुद्ध कल्कि, अवतार आए।
युग युग में भगवान, भक्तों को तराए॥
लक्ष्मी नारायण गोविंद, हरि हरि बोलो।
विष्णु भगवान की जय हो, मन में भाव भरो॥
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लक्ष्मी नारायण गोविंद के बारे में
“लक्ष्मी नारायण गोविंद” विष्णु को समर्पित एक लोकप्रिय भजन है। नीचे इसके पूर्ण बोल शुद्ध हिंदी में दिए गए हैं। इसे भजन-कीर्तन, पूजा या नित्य स्मरण में गा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लक्ष्मी नारायण गोविंद के बोल कहाँ पढ़ें?
लक्ष्मी नारायण गोविंद के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और भजन-कीर्तन में गा सकते हैं।
लक्ष्मी नारायण गोविंद किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी भक्ति व स्तुति में गाया जाता है।
लक्ष्मी नारायण गोविंद कब गाया जाता है?
इसे प्रातः या संध्या पूजा, आरती, भजन-कीर्तन के दौरान अथवा नित्य स्मरण के रूप में किसी भी समय गाया जा सकता है।