या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वर दण्ड मण्डित करा, या श्वेत पद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभिः, देवैः सदा पूजिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती, निःशेष जाड्यापहा॥
सरस्वती माता तू ज्ञान की देवी।
बुद्धि और विवेक की, तू ही एकमेवी॥
वीणावादिनी, ज्ञानप्रदायिनी।
हंसवाहिनी, मोक्षप्रदायिनी॥
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हे सरस्वती माँ, हे विद्या की देवी।
करो कृपा अब, बन जाएँ हम तेरे सेवी॥
मन के अंधेरे को, ज्ञान से मिटाओ।
विद्या की किरणें, हमारे जीवन में लाओ॥
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सरस्वती वंदना के बारे में
“सरस्वती वंदना” सरस्वती को समर्पित एक लोकप्रिय भजन है। नीचे इसके पूर्ण बोल शुद्ध हिंदी में दिए गए हैं — साथ ही रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण भी। इसे भजन-कीर्तन, पूजा या नित्य स्मरण में गा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सरस्वती वंदना के बोल कहाँ पढ़ें?
सरस्वती वंदना के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और भजन-कीर्तन में गा सकते हैं।
सरस्वती वंदना किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान सरस्वती को समर्पित है और उनकी भक्ति व स्तुति में गाया जाता है।
क्या सरस्वती वंदना रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर सरस्वती वंदना के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि हिंदी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।
सरस्वती वंदना कब गाया जाता है?
इसे प्रातः या संध्या पूजा, आरती, भजन-कीर्तन के दौरान अथवा नित्य स्मरण के रूप में किसी भी समय गाया जा सकता है।