
सोमवती अमावस्या: सोमवार की अमावस्या क्यों विशेष है और पितृ तर्पण कैसे करें
सोमवती अमावस्या — सोमवार को आने वाली अमावस्या — पितरों की शांति के लिए सबसे शक्तिशाली तिथि है। जानें इसका महत्व और तर्पण विधि।
अमावस्या हर महीने आती है, पर जब यह सोमवार को पड़ती है तो सोमवती अमावस्या कहलाती है — हिंदू पंचांग की सबसे दुर्लभ और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण तिथियों में से एक। पितृ कर्म के लिए यह विशेष रूप से पवित्र है।
सोमवती अमावस्या दुर्लभ क्यों है?
चंद्र मास औसतन लगभग 29.5 दिन का होता है, जबकि सप्ताह 7 दिन का। इसलिए अमावस्या लगभग हर 5–6 महीने में एक बार ही सोमवार को पड़ती है। कई वर्षों में केवल 1–2 सोमवती अमावस्या आती हैं। यही दुर्लभता इसे विशेष शुभ बनाती है। 2026 में सोमवती अमावस्या 15 जून और 9 नवंबर को है।
पितृ कर्म में महत्व
सभी अमावस्याएं पितृ पूजा — पूर्वजों की आराधना — के लिए पवित्र मानी जाती हैं। पर सोमवती अमावस्या का प्रभाव अधिक है, क्योंकि सोमवार का स्वामी चंद्रमा है, जो ज्योतिष में मन, भावनाओं और पितृ लोक का प्रतीक है। चंद्रमा के दिन और चंद्रमा की सबसे अंधकारमय अवस्था का यह मेल पितरों के लिए विशेष अवसर बनाता है।
स्कंद पुराण के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी के तट पर किया गया तर्पण पूरे वर्ष के पितृ कर्म के बराबर पुण्य देता है।
सोमवती अमावस्या पर पितृ तर्पण कैसे करें
- समय: दोपहर से पहले करें — सूर्योदय के समय या कुतुप मुहूर्त (मध्याह्न काल) में सर्वोत्तम है।
- स्थान: नदी तट आदर्श है। घर पर तांबे के स्वच्छ पात्र में जल लेकर करें।
- सामग्री: काले तिल, कुश, जल, गंगाजल, कच्चा दूध।
- संकल्प: अपना गोत्र और जिन पितरों को तर्पण दे रहे हैं उनके नाम बोलें।
- अर्पण: दोनों हाथों की अंजुलि में कुश रखकर, तिल मिला जल दक्षिण दिशा (पितृ दिशा) की ओर अर्पित करें और पितरों का नाम लेकर उनकी तृप्ति की प्रार्थना करें।
- प्रत्येक पितर को तीन-तीन बार जल दें — पिता, दादा, परदादा (पितृ पक्ष) और इसी प्रकार मातृ पक्ष।
- तर्पण के बाद: ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन (विशेषकर खीर और तिल की मिठाई) दान करें।
अन्य परंपराएं
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत रखें और केवल एक बार भोजन करें
- शिव मंदिर या पीपल वृक्ष के दर्शन करें — अमावस्या पर पीपल को पितरों का निवास माना जाता है
- सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए पीपल की परिक्रमा करती हैं
- संध्या को पितृ शांति के लिए घर में तिल के तेल का दीपक जलाएं