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राम रक्षा स्तोत्र महर्षि बुध कौशिक द्वारा स्वप्न में प्राप्त एक प्राचीन रक्षात्मक स्तोत्र है जो भगवान राम को शरीर के हर अंग की रक्षा के लिए कवच के रूप में आवाहन करता है।
“राम रक्षा स्तोत्र” राम की स्तुति में रचित 38 छंदों का पावन पाठ है। मान्यता है कि इसका नित्य पाठ करने से भय दूर होता है और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। नीचे इसके सभी 38 छंद शुद्ध हिंदी, रोमन लिप्यंतरण एवं अर्थ सहित दिए गए हैं।