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बैंगलोर · श्री विष्णु
अक्षय तृतीया (अक्षय = कभी न क्षीण होने वाला + तृतीया = तीसरा दिन) वैशाख शुक्ल तृतीया को पड़ती है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह वर्ष के साढ़े तीन अत्यंत शुभ मुहूर्तों में से एक है — इस दिन बिना किसी शुभ मुहूर्त की गणना किए कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है।
इस दिन सतयुग और त्रेता युग का आरंभ माना जाता है। भगवान परशुराम का जन्म इसी दिन हुआ। माँ गंगा का धरती पर अवतरण इसी दिन हुआ। सुदामा ने इसी दिन श्रीकृष्ण से मिलकर अपनी दरिद्रता से मुक्ति पाई। पांडवों को अक्षय पात्र (कभी न खाली होने वाला पात्र) इसी दिन मिला।
इस दिन सोना खरीदना सर्वाधिक शुभ माना जाता है — मान्यता है कि इस दिन खरीदी वस्तु में वृद्धि होती है। विवाह, गृह-प्रवेश, नया व्यवसाय आरंभ करना और दान-पुण्य करना विशेष फलदायी है। पितृ-तर्पण और गंगा-स्नान का भी महत्व है।
जैन धर्म में इसे अक्षय तृतीया या आखा तीज के रूप में मनाया जाता है — यह वह दिन है जब जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने एक वर्ष के दीर्घ उपवास के बाद गन्ने के रस से पारण किया था।
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए दान, जप और पूजा का फल कभी क्षीण नहीं होता। सोना खरीदना और नए काम शुरू करना शुभ है।
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