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पुणे · श्री गणेश
गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। यह भगवान गणेश (हाथी के मुख वाले देवता — प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, ज्ञान और बुद्धि के देवता) का जन्मोत्सव है। 10 दिन तक चलने वाला यह पर्व अनंत चतुर्दशी पर मूर्ति के विसर्जन के साथ समाप्त होता है।
माँ पार्वती ने स्नान से पूर्व अपने शरीर के मैल से एक पुतला बनाया और उसमें प्राण फूँक दिए। जब भगवान शिव ने प्रवेश करना चाहा, उस बालक ने द्वार रोक दिया। क्रोधित शिव ने उसका मस्तक काट दिया। दुखी पार्वती ने शिव से पुत्र को जीवित करने की प्रार्थना की। शिव ने उत्तर दिशा में मिले हाथी के शिशु का मस्तक लगाकर बालक को पुनर्जीवित किया।
सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने आरंभ की — ब्रिटिश शासन में एकता और राष्ट्र-भावना जगाने के लिए। पुणे के लालबागचा राजा, दगडूशेठ हलवाई जैसे भव्य पंडाल विश्वप्रसिद्ध हैं।
गणेशजी को मोदक (मीठे पकौड़े) सर्वाधिक प्रिय हैं। प्रतिदिन आरती, भजन और प्रसाद वितरण होता है। विसर्जन शोभायात्रा में लाखों भक्त नदी, सागर या तालाब तक मूर्ति को ले जाकर विदाई देते हैं — "गणपति बप्पा मोरया!"
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश का जन्मोत्सव है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को यह पर्व मनाया जाता है। 10 दिन तक गणपति की स्थापना कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और अंत में विसर्जन किया जाता है।
⏱ समय पुणे के अनुसार · तिथि व नक्षत्र सम्पूर्ण भारत में समान
गणेश चतुर्थी का प्रथम दिन — श्री गणेश की मूर्ति को विधिवत स्थापित कर प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। षोडशोपचार (16 उपचार) से पूजा होती है। मोदक और दूर्वा घास अर्पित किए जाते हैं।
दूसरे दिन से प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल गणेश जी की आरती की जाती है। प्रतिदिन नए मोदक या मिठाई का भोग लगाया जाता है। भजन-कीर्तन और गणेश स्तुति का पाठ होता है।
कुछ परिवार पाँचवें दिन गणेश विसर्जन करते हैं। उत्तर भारत में यह प्रचलित है। विसर्जन से पहले अंतिम आरती और पूजा की जाती है।
सातवें दिन का विसर्जन भी प्रचलित है, विशेषकर सार्वजनिक गणेशोत्सव में। भव्य शोभायात्रा, ढोल-ताशे और नृत्य के साथ विसर्जन होता है।
गणेशोत्सव का अंतिम दिन — दसवें दिन भव्यतम विसर्जन होता है। "गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या" के जयघोष के साथ लाखों मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है। यह भारत के सबसे भव्य जुलूसों में से एक है।