जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
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एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
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पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
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अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
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सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
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दीनन की लाज रखो शम्भु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊँ बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
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जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
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जय गणेश जय गणेश देवा के बारे में
“जय गणेश जय गणेश देवा” गणेश की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 6 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जय गणेश जय गणेश देवा के बोल कहाँ पढ़ें?
जय गणेश जय गणेश देवा के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
जय गणेश जय गणेश देवा किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान गणेश को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
जय गणेश जय गणेश देवा कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या जय गणेश जय गणेश देवा रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर जय गणेश जय गणेश देवा के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।