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दिल्ली · श्री शिव
महाशिवरात्रि (महा = महान + शिव + रात्रि = रात्रि) फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। यह वर्ष की सबसे पवित्र रात्रि मानी जाती है जब भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति सर्वाधिक अनुभव की जाती है। शैव मत में यह पर्व दीपावली के समान महत्व रखता है।
शिव-पार्वती विवाह — इसी रात्रि शिव और पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। ज्योतिर्लिंग प्रकट — इस रात शिव अग्नि-स्तम्भ के रूप में प्रकट हुए जिसका न आदि मिला न अंत। समुद्र मंथन में निकले हलाहल विष को शिव ने इसी रात कंठ में धारण किया — नीलकंठ बने।
भक्त रात्रि के चार पहरों में शिवलिंग का चार बार अभिषेक करते हैं — जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से। बिल्वपत्र, धतूरा, भाँग और श्वेत पुष्प शिव को अत्यंत प्रिय हैं। रात्रि-जागरण में शिव-स्तोत्र, रुद्राष्टाध्यायी और भजनों का अनवरत पाठ होता है।
12 ज्योतिर्लिंग — सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, वैद्यनाथ, भीमाशंकर, रामेश्वरम, नागेश्वर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, केदारनाथ और घृष्णेश्वर — इन सभी पर इस रात लाखों भक्त आते हैं। काशी में तो रात भर बाबा विश्वनाथ के दर्शन की अटूट कतार लगती है।
महाशिवरात्रि भगवान शिव की महारात्रि है। इस रात भक्त रात भर जागकर शिव का ध्यान और पूजा करते हैं। यह दिन शिव-पार्वती के विवाह की वर्षगाँठ भी माना जाता है। बेल पत्र और जल का विशेष महत्व है।
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