जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीश तिहुं लोक उजागर॥
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राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि पुत्र पवन सुत नामा॥
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीश तिहुं लोक उजागर॥
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महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीश तिहुं लोक उजागर॥
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कंचन वरण विराज सुवेशा।
कानन कुण्डल कुंचित केशा॥
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीश तिहुं लोक उजागर॥
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हाथ बज्र औ ध्वजा विराजे।
काँधे मूंज जनेऊ साजे॥
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीश तिहुं लोक उजागर॥
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शंकर सुवन केसरी नंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीश तिहुं लोक उजागर॥
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जय हनुमान ज्ञान गुण सागर के बारे में
“जय हनुमान ज्ञान गुण सागर” हनुमान को समर्पित एक लोकप्रिय भजन है। नीचे इसके पूर्ण बोल शुद्ध हिंदी में दिए गए हैं। इसे भजन-कीर्तन, पूजा या नित्य स्मरण में गा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर के बोल कहाँ पढ़ें?
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और भजन-कीर्तन में गा सकते हैं।
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान हनुमान को समर्पित है और उनकी भक्ति व स्तुति में गाया जाता है।
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर कब गाया जाता है?
इसे प्रातः या संध्या पूजा, आरती, भजन-कीर्तन के दौरान अथवा नित्य स्मरण के रूप में किसी भी समय गाया जा सकता है।