मेरे मन मंदिर में आओ हनुमान।
तुम्हारे बिना सूना दिल का मकान॥
◆
संकट काटे वज्र का है तेरा तन।
राम नाम का जप करे हर पल यह मन॥
मेरे मन मंदिर में आओ हनुमान।
तुम्हारे बिना सूना दिल का मकान॥
◆
लंका जाकर सीता माँ को ढूँढा।
रावण से लड़कर राम का काज जुड़ा॥
मेरे मन मंदिर में आओ हनुमान।
तुम्हारे बिना सूना दिल का मकान॥
◆
पर्वत उठाकर लाए संजीवन।
लखन के प्राण बचाए, वीर हनुमन॥
मेरे मन मंदिर में आओ हनुमान।
तुम्हारे बिना सूना दिल का मकान॥
◆
तुम्हारी भक्ति से मिले राम दरबार।
हे पवनपुत्र करो भव से उद्धार॥
मेरे मन मंदिर में आओ हनुमान।
तुम्हारे बिना सूना दिल का मकान॥
❀
मेरे मन मंदिर में आओ के बारे में
“मेरे मन मंदिर में आओ” हनुमान को समर्पित एक लोकप्रिय भजन है। नीचे इसके पूर्ण बोल शुद्ध हिंदी में दिए गए हैं। इसे भजन-कीर्तन, पूजा या नित्य स्मरण में गा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मेरे मन मंदिर में आओ के बोल कहाँ पढ़ें?
मेरे मन मंदिर में आओ के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और भजन-कीर्तन में गा सकते हैं।
मेरे मन मंदिर में आओ किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान हनुमान को समर्पित है और उनकी भक्ति व स्तुति में गाया जाता है।
मेरे मन मंदिर में आओ कब गाया जाता है?
इसे प्रातः या संध्या पूजा, आरती, भजन-कीर्तन के दौरान अथवा नित्य स्मरण के रूप में किसी भी समय गाया जा सकता है।