पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
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जनम जनम की पूंजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरचे नहिं कोई चोर न लेवे, दिन दिन बढ़त सवायो॥
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
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सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तरवायो।
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर, हरख हरख जस गायो॥
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
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लोग कहे मीरा भई बावरी, ससुरे कहे कुलनासी।
मीरा के मन तो प्रेम रंग चढ़यो, अब क्या जग की खासी॥
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
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विष का प्याला राणे भेज्यो, पीकर अमर भई।
माला पहन के राम रंग रँगी, जीवन सफल भई॥
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
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पायो जी मैंने राम रतन धन पायो के बारे में
“पायो जी मैंने राम रतन धन पायो” राम को समर्पित एक Mirabai द्वारा रचित लोकप्रिय भजन है। नीचे इसके पूर्ण बोल शुद्ध हिंदी में दिए गए हैं। इसे भजन-कीर्तन, पूजा या नित्य स्मरण में गा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो के बोल कहाँ पढ़ें?
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और भजन-कीर्तन में गा सकते हैं।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान राम को समर्पित है और उनकी भक्ति व स्तुति में गाया जाता है।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो की रचना किसने की?
यह भजन Mirabai द्वारा रचित है।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो कब गाया जाता है?
इसे प्रातः या संध्या पूजा, आरती, भजन-कीर्तन के दौरान अथवा नित्य स्मरण के रूप में किसी भी समय गाया जा सकता है।