इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं।
मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनं॥
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मन जाहि राच्यो मिलहि सो वर सहज सुंदर साँवरो।
करुणा निधान सुजान शील स्नेह जानत रावरो॥
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एही भाँति गौरी असीस सुनि सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥
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श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन के बारे में
“श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन” राम को समर्पित एक लोकप्रिय भजन है। नीचे इसके पूर्ण बोल शुद्ध हिंदी में दिए गए हैं। इसे भजन-कीर्तन, पूजा या नित्य स्मरण में गा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन के बोल कहाँ पढ़ें?
श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और भजन-कीर्तन में गा सकते हैं।
श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान राम को समर्पित है और उनकी भक्ति व स्तुति में गाया जाता है।
श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन कब गाया जाता है?
इसे प्रातः या संध्या पूजा, आरती, भजन-कीर्तन के दौरान अथवा नित्य स्मरण के रूप में किसी भी समय गाया जा सकता है।