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टोरंटो · श्री कृष्ण / विष्णु
होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह वसंत ऋतु का सबसे उल्लासमय पर्व है — बुराई पर अच्छाई की विजय, प्रेम और भाईचारे का उत्सव। दो दिन मनाया जाता है: पहले दिन होलिका दहन (अलाव) और दूसरे दिन धुलंडी (रंगों का उत्सव)।
अत्याचारी राजा हिरण्यकश्यप चाहता था कि सब उसे ईश्वर मानें। किंतु उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका (जिसे अग्नि में न जलने का वरदान था) को प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने को कहा। किंतु ईश्वरीय कृपा से प्रहलाद बचे और होलिका जल गई। इसी घटना की याद में होलिका दहन होता है।
मथुरा-वृंदावन में होली का एक अन्य रूप है — राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम का उत्सव। कृष्ण ने बरसाने में राधा और गोपियों के साथ होली खेली — लठमार होली (बरसाना-नंदगाँव) और फूलों की होली (वृंदावन) इसी प्रेम-परंपरा के रूप हैं।
ब्रज (मथुरा-वृंदावन-बरसाना) — 40 दिन का होली महोत्सव। पंजाब — होला मोहल्ला (सिख परंपरा में मार्शल आर्ट प्रदर्शन)। बंगाल — दोल यात्रा (राधा-कृष्ण की पालकी शोभायात्रा)। गुजरात — गोविंदा उत्सव।
होली रंगों का त्योहार है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंग खेला जाता है। यह प्रह्लाद की भक्ति और होलिका के अहंकार की पराजय का प्रतीक है।
⏱ समय टोरंटो के अनुसार · तिथि व नक्षत्र सम्पूर्ण भारत में समान
⏰ समय टोरंटो के स्थानीय समयानुसार (America/Toronto)
होलिका दहन पूर्णिमा की रात्रि को किया जाता है। लकड़ी, गोबर के उपले और सूखे पत्तों की होली सजाकर शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
रंगों का त्योहार — सभी लोग एक-दूसरे पर रंग, गुलाल और पानी डालकर होली खेलते हैं। ठंडाई और भाँग पीने, गुजिया खाने और ढोल-नगाड़ों पर नाचने की परम्परा है। सभी भेदभाव भुलाकर प्रेम से मिलते हैं।