भक्तिमाला ऐप
🔔 रिमाइंडर · 🪔 आरती · 📿 पंचांग

श्री सरस्वती
वसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है — वसंत ऋतु के आगमन का प्रथम दिन। इस दिन ज्ञान, संगीत, कला और विद्या की देवी माँ सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना होती है। पूरी प्रकृति पीले फूलों से सज जाती है — इसीलिए पीले वस्त्र पहनना इस दिन का विशेष रिवाज है।
माँ सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और वीणा बजाती हैं। उनके चार हाथों में वीणा, वेद-पुस्तक, माला और कमंडल हैं। श्वेत हंस उनका वाहन है। वे विवेक, वाणी और सृजनशीलता की अधिष्ठात्री देवी हैं।
विद्यार्थी इस दिन पुस्तकें और वाद्य यंत्र देवी के चरणों में रखकर आशीर्वाद लेते हैं। विद्यारंभ संस्कार (बच्चे का पहला अक्षर-ज्ञान) इस दिन कराना शुभ माना जाता है। बसंत पंचमी को कामदेव (प्रेम के देवता) का पर्व भी माना जाता है — कवि कालिदास ने इसी दिन की महिमा में काव्य रचे।
पश्चिम बंगाल — सरस्वती पूजा का सबसे भव्य आयोजन; छात्र-छात्राएँ पीले वस्त्र में सजी प्रतिमाओं की पूजा करते हैं। पंजाब — पतंगबाजी और सरसों के खेतों में उत्सव। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज (माघ मेला का समापन) और मथुरा-वृंदावन में विशेष उत्सव।
वसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। माघ शुक्ल पंचमी को वसंत ऋतु का आगमन होता है। पीला रंग इस दिन का प्रतीक है। विद्यार्थी विद्या और कला की देवी सरस्वती का आशीर्वाद लेते हैं।
⏱ समय नई दिल्ली के अनुसार · तिथि व नक्षत्र सम्पूर्ण भारत में समान