बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहत, गल मोतियन माला॥
ॐ जय सरस्वती माता।
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देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
ॐ जय सरस्वती माता।
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विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥
ॐ जय सरस्वती माता।
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धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञान प्रकाश दो माता, मन में शांति भरो॥
ॐ जय सरस्वती माता।
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ॐ जय सरस्वती माता के बारे में
“ॐ जय सरस्वती माता” सरस्वती की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 6 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ॐ जय सरस्वती माता के बोल कहाँ पढ़ें?
ॐ जय सरस्वती माता के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
ॐ जय सरस्वती माता किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान सरस्वती को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
ॐ जय सरस्वती माता कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या ॐ जय सरस्वती माता रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर ॐ जय सरस्वती माता के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।