जाके बल से गिरिवर काँपे।
रोग दोष जाके निकट न झाँके॥
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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दे बीड़ा रघुपति मुसकाए।
अंगद सहित पार उतराए॥
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवन सुत बार न लाई॥
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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लंका जारि असुर संहारे।
सिया राम जी के काज सँवारे॥
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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पैठि पाताल तोरि जम कारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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बाईं भुजा असुर दल मारे।
दाहिनी भुजा संतजन तारे॥
आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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आरती कीजे हनुमान लला की के बारे में
“आरती कीजे हनुमान लला की” हनुमान की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 7 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरती कीजे हनुमान लला की के बोल कहाँ पढ़ें?
आरती कीजे हनुमान लला की के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
आरती कीजे हनुमान लला की किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान हनुमान को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
आरती कीजे हनुमान लला की कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या आरती कीजे हनुमान लला की रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर आरती कीजे हनुमान लला की के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।