सुर नर मुनि जन आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥
आरती कीजै हनुमान लला की॥
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जो हनुमानजी की आरती गावे।
बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥
लंक विध्वंस किए रघुराई।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
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आरती कीजे हनुमान लला की के बारे में
“आरती कीजे हनुमान लला की” हनुमान की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 7 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरती कीजे हनुमान लला की के बोल कहाँ पढ़ें?
आरती कीजे हनुमान लला की के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
आरती कीजे हनुमान लला की किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान हनुमान को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
आरती कीजे हनुमान लला की कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या आरती कीजे हनुमान लला की रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर आरती कीजे हनुमान लला की के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।