ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी।
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जय अम्बे गौरी के बारे में
“जय अम्बे गौरी” दुर्गा की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 8 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जय अम्बे गौरी के बोल कहाँ पढ़ें?
जय अम्बे गौरी के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
जय अम्बे गौरी किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान दुर्गा को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
जय अम्बे गौरी कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या जय अम्बे गौरी रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर जय अम्बे गौरी के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।