हे गोपाल हे गोपाल, देखन को ललचाये नैन।
वृन्दावन के वन में बजाए, कान्हा की बाँसुरी सुहाने सैन॥
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यमुना के घाट पर, राधा संग खेले होली।
रंग गुलाल उड़ाए, प्रेम की बोली॥
हे गोपाल हे गोपाल, देखन को ललचाये नैन।
वृन्दावन के वन में बजाए, कान्हा की बाँसुरी सुहाने सैन॥
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नंद के दुलारे गोपाल, यशोदा के नंदन।
सारे ब्रज के चोर, दही माखन कंदन॥
हे गोपाल हे गोपाल, देखन को ललचाये नैन।
वृन्दावन के वन में बजाए, कान्हा की बाँसुरी सुहाने सैन॥
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गिरधर गोपाल कान्हा, द्वारिकाधीश।
जग के पालनहार, देवकी के नंद धीश॥
हे गोपाल हे गोपाल, देखन को ललचाये नैन।
वृन्दावन के वन में बजाए, कान्हा की बाँसुरी सुहाने सैन॥
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हे गोपाल हे गोपाल के बारे में
“हे गोपाल हे गोपाल” कृष्ण को समर्पित एक लोकप्रिय भजन है। नीचे इसके पूर्ण बोल शुद्ध हिंदी में दिए गए हैं। इसे भजन-कीर्तन, पूजा या नित्य स्मरण में गा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हे गोपाल हे गोपाल के बोल कहाँ पढ़ें?
हे गोपाल हे गोपाल के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और भजन-कीर्तन में गा सकते हैं।
हे गोपाल हे गोपाल किस देवता को समर्पित है?
यह भजन भगवान कृष्ण को समर्पित है और उनकी भक्ति व स्तुति में गाया जाता है।
हे गोपाल हे गोपाल कब गाया जाता है?
इसे प्रातः या संध्या पूजा, आरती, भजन-कीर्तन के दौरान अथवा नित्य स्मरण के रूप में किसी भी समय गाया जा सकता है।