
सूर्य ग्रहण 2026: तिथियाँ, क्या करें और क्या न करें — शास्त्र के अनुसार
2026 के सूर्य ग्रहण की पूरी जानकारी — तिथियाँ, भारत में दृश्यता, और ग्रहण काल में क्या करें क्या न करें।
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेता है। हिंदू परंपरा में ग्रहण महत्वपूर्ण खगोलीय और आध्यात्मिक घटना है, जिसके नियम प्राचीन शास्त्रों पर आधारित हैं।
2026 में सूर्य ग्रहण की तिथियाँ
- 17 फरवरी 2026 — वलयाकार सूर्य ग्रहण, मुख्यतः अंटार्कटिका से दिखाई देगा। भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक लागू नहीं होगा।
- 12 अगस्त 2026 — पूर्ण सूर्य ग्रहण। ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल में पूर्ण ग्रहण के रूप में दिखाई देगा।
- भारत में दिखाई नहीं देगा — इस ग्रहण की छाया दक्षिण एशिया तक नहीं पहुँचती, देश के सबसे उत्तरी भागों तक भी नहीं। स्थानीय रूप से दिखाई न देने के कारण भारत में कहीं भी इसका सूतक लागू नहीं होगा। हर आगामी ग्रहण की दृश्यता के लिए हमारा ग्रहण कैलेंडर देखें।
सूतक काल क्या है?
सूतक ग्रहण से पहले की अशुद्धि की अवधि है। सूर्य ग्रहण में:
- सूतक ग्रहण आरंभ होने से 12 घंटे पहले शुरू होता है
- सूतक में परंपरा से भोजन पकाना, खाना और सोना वर्जित है
- गर्भवती महिलाओं, बुज़ुर्गों और बच्चों को सामान्यतः कठोर सूतक पालन से छूट दी जाती है
- अधिकांश परंपराओं के अनुसार यदि ग्रहण आपके स्थान से दिखाई न दे तो सूतक लागू नहीं होता
सूर्य ग्रहण के समय क्या करें
- मंत्र जाप: सूर्य मंत्र (ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः), महामृत्युंजय मंत्र या गायत्री मंत्र ग्रहण काल में विशेष फलदायी माने जाते हैं
- ध्यान और प्रार्थना: ग्रहण काल साधना के लिए प्रभावशाली माना जाता है
- स्नान: ग्रहण के आरंभ में और समाप्त होते ही स्नान करें
- दान: ग्रहण के समय जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है
- कुश रखें: घर में रखे भोजन और जल में कुश डालें, ताकि वे दूषित न हों
सूर्य ग्रहण के समय क्या न करें
- यदि आपने सूतक माना है तो ग्रहण काल (आरंभ से समाप्ति तक) में भोजन न करें
- सूर्य को सीधे न देखें — यह आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों सलाह है (ग्रहण चश्मे का प्रयोग करें)
- ग्रहण काल में शल्य क्रिया या नए कार्य आरंभ करने से बचें
- गर्भवती महिलाओं को घर के भीतर रहने की पारंपरिक सलाह दी जाती है
- ग्रहण काल में भोजन न पकाएं — इस समय बना भोजन अशुद्ध माना जाता है
ग्रहण के बाद: गृह शुद्धि
ग्रहण समाप्त होने पर पूर्ण स्नान करें, पूरे घर में गंगाजल छिड़कें, और ग्रहण के समय बाहर रखे बर्तन और वस्त्र धो लें। इसके बाद सामान्य कार्य आरंभ कर सकते हैं।
विज्ञान और शास्त्र
आधुनिक खगोल विज्ञान ग्रहण को पूर्वानुमान योग्य ज्यामितीय संरेखण के रूप में समझाता है। प्राचीन शास्त्रों ने ग्रहण को ब्रह्मांडीय ऊर्जा के तीव्र काल के रूप में देखा — जब सूर्य का प्रकाश कुछ समय के लिए क्षीण हो जाता है। सूतक और साधना के नियम इसलिए बने कि लोग यह समय सांसारिक कार्यों के बजाय चिंतन में बिताएं।