ॐ
भक्तिमाला ऐप
🔔 रिमाइंडर · 🪔 आरती · 📿 पंचांग
कबीर कहते हैं कि रात्रि में जितने तारे होते हैं, उतने ही आँसू (ईश्वर-वियोग में) मेरी आँखों से बहे हैं। रोते-रोते आँखें धुँधली हो गईं—राम से इस शरीर का मिलन कितना दुर्लभ है। यह दोहा प्रभु-विरह की तीव्र व्याकुलता को व्यक्त करता है।