आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥
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दशरथ तनय कौशल्या नन्दन,
सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन।
अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन,
मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥
आरती कीजै श्री रघुवर जी की॥
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निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि,
सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि।
हरण शोक-भय दायक नव निधि,
माया रहित दिव्य नर वर की॥
आरती कीजै श्री रघुवर जी की॥
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जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
अखिल लोक पालक त्रिलोक गति।
विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति,
एक मात्र गति सचराचर की॥
आरती कीजै श्री रघुवर जी की॥
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शरणागत वत्सल व्रतधारी,
भक्त कल्प तरुवर असुरारी।
नाम लेत जग पावनकारी,
वानर सखा दीन दुख हर की॥
आरती कीजै श्री रघुवर जी की॥
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आरती कीजै श्री रघुवर जी की के बारे में
“आरती कीजै श्री रघुवर जी की” राम की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 5 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आरती कीजै श्री रघुवर जी की के बोल कहाँ पढ़ें?
आरती कीजै श्री रघुवर जी की के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
आरती कीजै श्री रघुवर जी की किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान राम को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
आरती कीजै श्री रघुवर जी की कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या आरती कीजै श्री रघुवर जी की रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर आरती कीजै श्री रघुवर जी की के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।