जय काली माता जय काली माता।
अष्टभुजी महाकाली, सब विधि सुख दाता॥
जय काली माता।
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काले रंग की माया, मुण्डमाल गले में।
दानव को संहारे, खड्ग हाथ में ले के॥
जय काली माता।
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महाकाल की संगिनी, दुर्गा का रूप है।
काशी में विराजती, शक्ति का स्वरूप है॥
जय काली माता।
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साधक जब पुकारे, शरण में आती हैं।
पापों को जलाकर, भव से पार लाती हैं॥
जय काली माता।
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नयन लाल विशाल, जीभ बाहर लटकी।
शव पर पाँव धरके, विकराल छवि झटकी॥
जय काली माता।
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जय काली जय काली, भक्तों की रक्षक हो।
मंगल करो महारानी, भव बाधा दूर करो॥
जय काली माता।
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काली माता आरती के बारे में
“काली माता आरती” काली की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 6 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
काली माता आरती के बोल कहाँ पढ़ें?
काली माता आरती के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
काली माता आरती किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान काली को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
काली माता आरती कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या काली माता आरती रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर काली माता आरती के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।