जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी जन पातक हरणा॥
जय लक्ष्मी रमणा।
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रत्नखचित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे।
नारद करत निराला, घण्टा ध्वनि बाजे॥
जय लक्ष्मी रमणा।
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प्रगट भए कलियुग में, आप किरपा धारी।
दीनन दुःखन हरियो, सुख संपत्ति भारी॥
जय लक्ष्मी रमणा।
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जिन कीनी भक्ति तुम्हारी, तिन हरि मिल आए।
जो निश्चल मन धरे, वो फल पाए॥
जय लक्ष्मी रमणा।
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नारद मुनि ने कीनी, तुम्हारी स्तुति।
हुई प्रसन्न होकर, दी फल की गति॥
जय लक्ष्मी रमणा।
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व्रत रख के पूजे, सत्यनारायण देवा।
फल पावे मन चाहा, करे नित्य सेवा॥
जय लक्ष्मी रमणा।
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सत्यनारायण आरती के बारे में
“सत्यनारायण आरती” विष्णु की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 6 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सत्यनारायण आरती के बोल कहाँ पढ़ें?
सत्यनारायण आरती के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
सत्यनारायण आरती किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
सत्यनारायण आरती कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या सत्यनारायण आरती रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर सत्यनारायण आरती के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।