मतंग ऋषि के आश्रम में शबरी नाम की एक तपस्विनी रहती थी। वह जाति से भीलनी थी, पर उसका हृदय भक्ति से परिपूर्ण था। अपने गुरु के जाते समय उन्होंने कहा था — "एक दिन प्रभु श्रीराम इस आश्रम में अवश्य पधारेंगे।"
इस एक वचन को अपने जीवन का आधार बनाकर शबरी वर्षों तक प्रतीक्षा करती रही। वह प्रतिदिन आश्रम का मार्ग बुहारती, पुष्प बिछाती और उस पथ को निहारती जिससे उसके प्रभु आने वाले थे। वृद्धावस्था आ गई, पर उसकी आशा और श्रद्धा कभी क्षीण नहीं हुई।