ॐ
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कबीर कहते हैं कि हे मनुष्य! तू इस संसार में किस उद्देश्य से आया था, और चादर तानकर अज्ञानता की नींद में सो रहा है। हे लापरवाह! अब सचेत हो जा और अपने सच्चे स्वरूप (आत्मा) को पहचान। यह दोहा आत्मज्ञान और जीवन के उद्देश्य की ओर जगाता है।