ॐ
भक्तिमाला ऐप
🔔 रिमाइंडर · 🪔 आरती · 📿 पंचांग
कबीर कहते हैं कि जब गुणों का सच्चा पारखी (ग्राहक) मिल जाए तो गुण लाखों में बिकते हैं, अर्थात उनका पूरा सम्मान होता है। परंतु जब गुणों का कोई कद्रदान न हो तो वही गुण कौड़ी के मोल चले जाते हैं। यह दोहा बताता है कि गुणों का मूल्य उन्हें पहचानने वाले पर निर्भर करता है।