ॐ
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कबीर कहते हैं कि जो भक्त राम-नाम के रस में भीग जाता है, उसका वह प्रेम-रस कभी सूखता नहीं। उस अनुभूति और भाव को शब्दों में दिखाया नहीं जा सकता; वह तो अकथनीय कहानी है। यह दोहा भक्ति-अनुभव की अवर्णनीय गहराई को व्यक्त करता है।