ॐ
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कबीर कहते हैं कि जो भी उत्पन्न होता है वह नष्ट होता ही है—वृक्ष, फूल, फल और पत्ते सभी। रात-दिन काल निरंतर आगे बढ़ता रहता है (और सबको अपने साथ ले जाता है)—इस सत्य को भली-भाँति समझ लो। यह दोहा संसार की अनित्यता का बोध कराता है।