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कबीर कहते हैं कि वे संसार रूपी बाज़ार में खड़े होकर सभी के कल्याण की कामना करते हैं। उनका न तो किसी से विशेष मित्रता का स्वार्थ है और न किसी से बैर। यह दोहा निष्पक्षता, समभाव और सबके प्रति सद्भावना का संदेश देता है।