पाप से पाप नहीं कटे, पाप से मिटे न पाप।
राम नाम जपने से, कटे पाप का ताप॥
paap se paap naheen kate, paap se mite na paap.
raam naam japne se, kate paap kaa taap.
— कबीर दास
हिंदी व्याख्या
कबीर कहते हैं कि पाप से पाप नहीं कटता और एक पाप से दूसरा पाप नहीं मिटता। पापों का संताप तो केवल राम-नाम के जप से ही दूर होता है। यह दोहा प्रायश्चित और पाप-मुक्ति के लिए हरि-नाम को एकमात्र उपाय बताता है।