सुन्दर देह पाई के, करे न सुन्दर काम।
तो वह देह किस काम की, नहीं जिसमें राम॥
sundar deh paaee ke, kare na sundar kaam.
to vah deh kis kaam kee, naheen jismen raam.
— कबीर दास
हिंदी व्याख्या
कबीर कहते हैं कि सुंदर शरीर पाकर भी यदि मनुष्य सुंदर (अच्छे) कर्म न करे, तो वह शरीर किस काम का जिसमें राम (ईश्वर का स्मरण) ही न हो? यह दोहा शरीर की सार्थकता सत्कर्म और प्रभु-स्मरण में बताता है।