आरती श्री नवग्रहों की कीजै।
बाध, कष्ट, रोग, हर लीजै॥
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सूर्य तेज व्यापे जीवन भर।
जाकी कृपा कबहुँ नहिं छीजै॥
आरती श्री नवग्रहों की कीजै॥
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रूप चंद्र शीतलता लायें।
शांति स्नेह सरस रसु भीजै॥
आरती श्री नवग्रहों की कीजै॥
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मंगल हरे अमंगल सारा।
सौम्य सुधा रस अमृत पीजै॥
आरती श्री नवग्रहों की कीजै॥
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बुध सदा वैभव यश लाये।
सुख सम्पति लक्ष्मी पसीजै॥
आरती श्री नवग्रहों की कीजै॥
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विद्या बुद्धि ज्ञान गुरु से ले लो।
प्रगति सदा मानव पै रीझै॥
आरती श्री नवग्रहों की कीजै॥
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शुक्र तर्क विज्ञान बढ़ावै।
देश धर्म सेवा यश लीजै॥
आरती श्री नवग्रहों की कीजै॥
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न्यायाधीश शनि अति प्यारे।
जप तप श्रद्धा शनि को दीजै॥
आरती श्री नवग्रहों की कीजै॥
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राहु मन का भरम हरावे।
साथ न कबहुँ कुकर्म न दीजै॥
आरती श्री नवग्रहों की कीजै॥
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स्वास्थ्य उत्तम केतु राखै।
पराधीनता मनहित खीजै॥
आरती श्री नवग्रहों की कीजै॥
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नवग्रह आरती के बारे में
“नवग्रह आरती” शनि की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 10 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवग्रह आरती के बोल कहाँ पढ़ें?
नवग्रह आरती के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
नवग्रह आरती किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान शनि को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
नवग्रह आरती कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या नवग्रह आरती रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर नवग्रह आरती के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।