ॐ जय जय जय नवग्रह देवा।
मंगल करहु हमारा, करहु हमारी सेवा॥
ॐ जय जय नवग्रह देवा।
◆
सूर्य देव की जय जय, प्रातःकाल पूजें।
स्वास्थ्य और बल देते, जन-जन की आस पूरे॥
ॐ जय जय नवग्रह देवा।
◆
चंद्रमा मन के स्वामी, शीतल शुभ कारी।
मन को शांति देते, हरते दुख भारी॥
ॐ जय जय नवग्रह देवा।
◆
मंगल शक्ति देते, साहस बल बढ़ाते।
अरिष्ट दोष हरते, भाग्य को जगाते॥
ॐ जय जय नवग्रह देवा।
◆
बुध बुद्धि के दाता, व्यापार के स्वामी।
विद्या वाणी देते, जन जन के अंतर्यामी॥
ॐ जय जय नवग्रह देवा।
◆
बृहस्पति गुरु देव, ज्ञान दान करते।
धर्म और संपत्ति का, कल्याण करते॥
ॐ जय जय नवग्रह देवा।
◆
शुक्र सुख के दाता, भोग विलास देते।
काम और कला में, सफलता देते॥
ॐ जय जय नवग्रह देवा।
◆
शनि न्याय के देवता, कर्म फल देते।
धैर्य धर्म से भक्त, कल्याण पाते॥
ॐ जय जय नवग्रह देवा।
◆
राहु केतु दोनों, छाया ग्रह कहाते।
काल सर्प भय हरते, मुक्ति दिलाते॥
ॐ जय जय नवग्रह देवा।
❀
नवग्रह आरती के बारे में
“नवग्रह आरती” शनि की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 9 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवग्रह आरती के बोल कहाँ पढ़ें?
नवग्रह आरती के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
नवग्रह आरती किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान शनि को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
नवग्रह आरती कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या नवग्रह आरती रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर नवग्रह आरती के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।