जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।
सूर्य के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥
जय जय श्री शनि देव।
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श्याम अंक वक्र दृष्टि, चतुर्भुज धारी।
नीलवस्त्र धारण किए, गृध्र सवारी॥
जय जय श्री शनि देव।
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क्रोध से जब देखते, ग्रहों में मानो।
सभी ग्रह काँपते, शक्ति को जानो॥
जय जय श्री शनि देव।
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पीपल वृक्ष के नीचे, तेल चढ़ाते।
शनिवार व्रत करके, भक्त सुख पाते॥
जय जय श्री शनि देव।
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काल और कर्म के, स्वामी तुम हो।
जो श्रद्धा से भजे, उनके हितकारी तुम हो॥
जय जय श्री शनि देव।
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शनि की महादशा में, धैर्य रखें भक्त।
कर्मानुसार फल मिले, रहें सदा युक्त॥
जय जय श्री शनि देव।
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शनि देव की आरती, जो नित्य गावे।
साढ़ेसाती और ढैया की, पीड़ा दूर भगावे॥
जय जय श्री शनि देव।
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शनि देव आरती के बारे में
“शनि देव आरती” शनि की एक प्रिय आरती है, जिसे दीप जलाकर प्रातः एवं संध्या पूजा में गाया जाता है। नीचे इसके पूर्ण 7 पद शुद्ध हिंदी और रोमन (अंग्रेज़ी) लिप्यंतरण में दिए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शनि देव आरती के बोल कहाँ पढ़ें?
शनि देव आरती के पूर्ण बोल इसी पृष्ठ पर शुद्ध हिंदी में निःशुल्क उपलब्ध हैं। आप इन्हें ऑनलाइन पढ़ सकते हैं और आरती के समय गा सकते हैं।
शनि देव आरती किस देवता की आरती है?
यह आरती भगवान शनि को समर्पित है और उनकी पूजा-अर्चना के समापन पर गाई जाती है।
शनि देव आरती कब और कैसे की जाती है?
आरती प्रातः या संध्या पूजा के अंत में की जाती है — घी या तेल का दीप जलाकर, उसे देवता के सम्मुख घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है।
क्या शनि देव आरती रोमन (अंग्रेज़ी) में उपलब्ध है?
हाँ, इस पृष्ठ पर शनि देव आरती के बोल हिंदी के साथ-साथ रोमन लिप्यंतरण में भी दिए गए हैं, ताकि देवनागरी न पढ़ पाने वाले भी इसे गा सकें।