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ऑकलैंड · श्री शिव-पार्वती / चंद्र
करवा चौथ (करवा = मिट्टी का घड़ा + चौथ = चतुर्थी) कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखती हैं — सूर्योदय से चंद्रोदय तक बिना अन्न-जल के।
वीरवती नाम की एक सुंदर और पतिव्रता स्त्री थी। पहली बार करवा चौथ का व्रत करते हुए वह बहुत व्याकुल हुई। उसके भाइयों ने दर्पण में झूठे चंद्रमा का प्रतिबिंब दिखाकर उसे व्रत तोड़वा दिया। इसके फलस्वरूप उसके पति की मृत्यु हो गई। अत्यंत दुखी वीरवती ने माँ पार्वती की आराधना की। देवी की कृपा से और सच्चे व्रत के पुण्य से उसके पति को पुनर्जीवन मिला।
सरगी (सास द्वारा दी गई भोर की भेंट) से दिन आरंभ होता है। दिनभर निर्जला व्रत के बाद सायंकाल करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। रात्रि में चंद्रमा का दर्शन छलनी में से किया जाता है — पहले पति का मुख देखकर, फिर चंद्रमा का। पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोला जाता है।
यह व्रत मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में प्रचलित है। आधुनिक समय में पति भी अपनी पत्नी के लिए व्रत रखने लगे हैं। शहरों में महिलाएँ सामूहिक रूप से करवा चौथ पूजन और मेहंदी उत्सव आयोजित करती हैं।
⏱ समय ऑकलैंड के अनुसार · तिथि व नक्षत्र सम्पूर्ण भारत में समान
⏰ समय ऑकलैंड के स्थानीय समयानुसार (Pacific/Auckland)
करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। चंद्रोदय के बाद चाँद को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।