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कोलकाता · पर्व विवरण
रक्षा बंधन (रक्षा = सुरक्षा + बंधन = बंधन / धागा) श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम और कर्तव्य का प्रतीक है — बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है और भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है।
इन्द्राणी और इन्द्र — जब इन्द्र देवता असुरों से पराजित होने लगे, तब उनकी पत्नी शचि (इन्द्राणी) ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधा और वे विजयी हुए। कृष्ण और द्रौपदी — जब श्रीकृष्ण की उँगली से रक्त बहने लगा, द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा बाँध दिया। कृष्ण ने तब चीरहरण के समय उनकी रक्षा की।
बहनें भाइयों की आरती उतारती हैं, तिलक लगाती हैं, राखी बाँधती हैं और मिठाई खिलाती हैं। भाई उपहार और आजीवन रक्षा का वचन देते हैं। जब भाई-बहन दूर हों तो राखी डाक से भेजी जाती है।
महाराष्ट्र और गोवा में इसी दिन नारली पूर्णिमा मनाई जाती है — मछुआरे समुद्र को नारियल अर्पित कर मानसून के अंत का स्वागत करते हैं। राजस्थान में यह "रामड़ी" के नाम से जाना जाता है और गुरु-शिष्य परंपरा में भी राखी बाँधी जाती है।
⏱ समय कोलकाता के अनुसार · तिथि व नक्षत्र सम्पूर्ण भारत में समान
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम का पर्व है। श्रावण पूर्णिमा को बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। इस दिन कजरी पूर्णिमा भी होती है।