एक दिन ऐसा होयगा, कोई काहू का नाहि।
घर की नारी को कहैं, तन की नारी जाहि॥
ek din aisaa hoygaa, koee kaahoo kaa naahi.
ghar kee naaree ko kahain, tan kee naaree jaahi.
— कबीर दास
हिंदी व्याख्या
कबीर कहते हैं कि एक दिन ऐसा आएगा जब कोई किसी का नहीं रहेगा। मृत्यु के समय घर के लोग शरीर रूपी संगिनी (आत्मा) से कह देंगे कि अब यहाँ से चली जाओ। यह दोहा सांसारिक संबंधों की नश्वरता का स्मरण कराता है।