जाति न पूछो साधु की, देखो अपनी करनी।
जो करनी राम नाम की, सोई भव से तरनी॥
jaati na poochho saadhu kee, dekho apnee karnee.
jo karnee raam naam kee, soee bhav se tarnee.
— कबीर दास
हिंदी व्याख्या
कबीर कहते हैं कि साधु की जाति मत पूछो, बल्कि अपने कर्मों को देखो। राम-नाम के स्मरण रूपी कर्म ही संसार-सागर से पार उतारने वाली नौका है। यह दोहा जाति-भेद से ऊपर उठकर सत्कर्म और भक्ति को महत्व देता है।