ॐ
भक्तिमाला ऐप
🔔 रिमाइंडर · 🪔 आरती · 📿 पंचांग
कबीर कहते हैं कि जो कुछ भी है वह सब ईश्वर का है, फिर तू उसे 'मेरा' क्यों कहता है? जब तू स्वयं ही नहीं रहेगा, तब तेरे लिए यह सुबह (सांसारिक वैभव) कहाँ रहेगी? यह दोहा 'मेरेपन' के मिथ्या अहंकार को उजागर करता है।