ॐ
भक्तिमाला ऐप
🔔 रिमाइंडर · 🪔 आरती · 📿 पंचांग
कबीर कहते हैं कि पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) के मेल से यह शरीर बना है और इसी से आशा-तृष्णा उपजती है। जब यह शरीर अंततः मिट्टी में मिल जाएगा तो फिर इसके लिए रोना-धोना किस काम का? यह दोहा शरीर की नश्वरता और तृष्णा के मिथ्यापन को दर्शाता है।