शीलवंत सबसे बड़ा, सब रतनन की खान।
तीन लोक की संपदा, रही शील में आन॥
sheelvant sabse badaa, sab ratanan kee khaan.
teen lok kee sampadaa, rahee sheel men aan.
— कबीर दास
हिंदी व्याख्या
कबीर कहते हैं कि शील (सच्चरित्रता) सबसे बड़ा गुण है और यह सभी रत्नों की खान है। तीनों लोकों की समस्त संपदा सद्चरित्र में ही समाई हुई है। यह दोहा चरित्र को सबसे बड़ा धन बताता है।