ॐ
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कबीर कहते हैं कि तू केवल पुस्तकों में लिखी बातों के आधार पर बोलता है, जबकि मैं अपनी आँखों से देखे (स्वयं अनुभव किए) सत्य की बात करता हूँ। मैं तो उलझन सुलझाने वाली बात कहता हूँ, पर तू उसे और उलझाए रखता है। यह दोहा पुस्तकीय ज्ञान पर आत्मानुभव की श्रेष्ठता बताता है।