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सत्ता और शासन में उथल-पुथल, अशांति
इस बार माँ घोड़ा पर नहीं, हाथी पर आएँगी (रविवार, 11 अक्टूबर 2026)।
और विदाई: चरणायुध पर गमन (विदाई)
जब नवरात्रि मंगलवार या शनिवार से शुरू होती है, तो माँ दुर्गा घोड़े (तुरंग) पर सवार होकर आती हैं।
श्लोक कहता है "छत्रभंगस्तुरंगमे" — घोड़े पर आगमन से छत्र-भंग, अर्थात् सत्ता-परिवर्तन, राजनीतिक उथल-पुथल और युद्ध जैसी स्थिति के संकेत मिलते हैं। घोड़ा गति और संघर्ष का प्रतीक है।
वाहन केवल वर्ष के संकेत बताता है, भय का कारण नहीं। श्रद्धा से घटस्थापना, नित्य पूजा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने पर माँ हर कष्ट दूर करती हैं।
शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता॥ गजे च जलदा देवी छत्रभंगस्तुरंगमे। नौकायां सर्वसिद्धिः स्याद् दोलायां मरणं ध्रुवम्॥
रविवार-सोमवार को नवरात्रि शुरू हो तो माँ हाथी पर, मंगलवार-शनिवार को घोड़े पर, गुरुवार-शुक्रवार को डोली में और बुधवार को नौका पर आती हैं। हाथी पर आने से अच्छी वर्षा, घोड़े पर छत्र-भंग (सत्ता परिवर्तन), नौका पर सब सिद्धि और डोली पर जन-हानि का संकेत है।
— देवी भागवत पुराण
नवरात्रि किस वार से शुरू होती है — उसी से वाहन तय होता है:
तिथि घटस्थापना (नवरात्रि का पहला दिन) की है। चैत्र और शारदीय दोनों नवरात्रि।